जैन वाणी का
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आज का पाठ
सम्पूर्ण-मण्डल-शशाङ्क-कला-कलाप- शुभ्रा गुणास्त्रि-भुवनं तव लङ्घयन्ति ।
पूर्ण चन्द्र-मण्डल की कलाओं के समूह के समान शुभ्र आपके गुण तीनों भुवनों को लाँघ जाते हैं। हे त्रिजगदीश्वर! जो एक नाथ के आश्रित हैं, उन्हें इच्छानुसार विचरण करने से कौन रोक सकता है?
आवश्यकता अनुसार श्लोक
चौबीस तीर्थंकर
मूल रचनाकारों एवं अनुवादकों
के प्रति आभार